बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव से पहले मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण अभियान को लेकर सियासत गर्मा गई है। पूर्णिया से सांसद राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव ने इस अभियान का पूर्ण बहिष्कार करने का एलान किया है और जनता से भी इसमें सहयोग न करने की अपील की है।
पप्पू यादव ने सोशल मीडिया के जरिए लोगों से कहा कि वे किसी भी बीएलओ (BLO) या चुनाव कर्मी को अपने गांव में प्रवेश न करने दें। उन्होंने कहा, “अगर कोई कर्मी आता है तो उसे चाय-पानी कर विदा करें, लेकिन कोई दस्तावेज या जानकारी न दें।” उन्होंने इस अभियान को “नौटंकी” बताते हुए लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला करार दिया।
सांसद पप्पू यादव ने आरोप लगाया कि यह अभियान गरीबों, युवाओं, पिछड़े और दलित वर्गों को मतदान से वंचित करने की साजिश है। उन्होंने कहा, “जब रक्षक ही भक्षक बन जाएं तो जनता को महायुद्ध छेड़ना ही पड़ेगा।” उनका कहना है कि गरीबों के पास अक्सर जन्म प्रमाणपत्र या अन्य आवश्यक दस्तावेज नहीं होते, जिससे लाखों लोग मतदाता सूची से बाहर हो सकते हैं।
उन्होंने सवाल उठाया, “जब बच्चों का जन्म प्रमाणपत्र नहीं बना, तो उनके माता-पिता के दस्तावेज कहां से आएंगे?”
गौरतलब है कि चुनाव आयोग 22 साल बाद बिहार में घर-घर जाकर वोटर सत्यापन करवा रहा है। जिन मतदाताओं के नाम 2003 के बाद जोड़े गए हैं, उन्हें पहचान प्रमाण देना होगा। यह प्रक्रिया अक्टूबर-नवंबर में संभावित विधानसभा चुनाव से पहले चल रही है।
इस अभियान पर राजद, कांग्रेस और वाम दलों ने भी सवाल उठाए हैं और टाइमिंग को लेकर संदेह जताया है। विपक्ष का आरोप है कि यह कवायद गरीब और वंचित तबके के वोट काटने की सोची-समझी रणनीति है।